जीवन व समाज की विद्रुपताओं, विडंबनाओं और विरोधाभासों पर तीखी नजर । यही तीखी नजर हास्य-व्यंग्य रचनाओं के रूप में परिणत हो जाती है । यथा नाम तथा काम की कोशिश की गई है । ये रचनाएं गुदगुदाएंगी भी और मर्म पर चोट कर बहुत कुछ सोचने के लिए विवश भी करेंगी ।

मंगलवार, 3 नवंबर 2015

देश है पस्त, दाल है मस्त


  
                        
    दाल ने गलने से मना कर दिया है...पता नहीं कहाँ से उठा लाते हो । पत्नी की तड़तड़ाती आवाज आई और मेरा दिल धक्क से रह गया । जब से दाल पाताल-उन्मुखी हुई है, तभी से मेरी पत्नी भी ज्वालामुखी हो गई है । अक्सर उसके मुँह से निकलते लावों का सामना करना पड़ता है मुझे । कुकर की सीटी मंद पड़ गई थी, पर उसकी आवाज बुलंद हो गई थी । पानी पीटते रह गये जीवन भर...मगर कोई ढंग का काम नहीं कर सके । किया होता, तो दाल की यूँ किल्लत न होती । यहाँ एक बात स्पष्ट कर दूँ । आज पूरे पन्द्रह दिन के बाद हमारे घर में दाल बन रही है ।
    खबरें आ रही हैं कि लोगों को शादी-ब्याह में उपहार के रूप में दालों के पैकेट मिल रहे हैं । काश, अपने यहाँ भी किसी की शादी होती और दाल का उपहार मिलता । मैंने तो वैसे भी सोच लिया है किसी भी तरह एक पैकेट दाल लाऊँगा और उसे डाइंग रूम में शो-केस में सजा दूँगा, ताकि हर आने-जाने वाले को भ्रमित कर सकूँ कि हमारे पास भी दाल का अतिरिक्त स्टॉक है ।
    उधर बाबा रामदेव ने बताया है कि लोगों को दाल का सेवन कम करना चाहिए, ताकि वात रोग न हो । राहत की बात है कि लोगों ने उनकी चेतावनी के पहले ही योगासन शुरू कर दिया है । आजकल लोगों में दाल वृत्त-आसन खूब लोकप्रिय हो रहा है । इस आसन में एक मुठ्ठी दाल रखकर उसके चारों ओर घेरा बना दिया जाता है । एक चक्कर लगाने के बाद साँस रोककर दाल पर नजर डाली जाती है । पाँच सेकेंड बाद साँस छोड़ते हुए नजर हटा ली जाती है । चक्करों की संख्या करने वाले की सामर्थ्य पर निर्भर करती है । एक सावधानी अत्यन्त आवश्यक है । दाल पर नजर डालते समय अगर लालच का भाव आ गया, तो यह आसन निष्प्रभावी हो जाता है ।
    दाल की उपस्थिति की जानकारी भी आवश्यक है । वह काला बाजार में है । सफेद बाजार में नींद में खलल के कारण वह चुपके से वहाँ चली गई । उसकी देखादेखी सरकारें भी तन्द्रा में थीं । अब जाकर वे हड़बड़ाई हैं । दाल में कभी काला हुआ करता था; पर अब जहाँ काला है, वहीं दाल है ।
    बन्दे की राय है कि दाल को दाल न कहा जाए । दाल से सर्वहारा की गंध आती है और अब यह सर्वहारा नहीं रही ।


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